X

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना 202: ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म | आवेदन फॉर्म, पात्रता

Beti bachao beti padhao yojana| बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना 2020|प्रधानमंत्री बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  योजना|बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना फॉर्म:

Beti bachao beti padhao yojana

परिचय

ऐसा क्या हुआ कि भारत जैसे पुरातन संस्कृति और अच्छे विचार वाले देश को बेटियों को बचाने के लिए और उनको पढ़ाने के लिए एक अलग मुहिम चलानी पड़ी। हमारा भारत देश पौराणिक संस्कृति के साथ-साथ महिलाओं के सम्मान और इज्जत के लिए जाना जाता था।  लेकिन बदलते समय के अनुसार हमारे देश के लोगों की सोच में भी बदलाव आ गया है। जिसके कारण अब बेटियों और महिलाओं के साथ एक समान व्यवहार नहीं किया जाता है।

हमारे देश के लोगों ने मिलकर हमारे देश में पुरुष प्रधान नीति को अपना लिया है जिसके कारण देश की बेटियों की स्थिति गंभीर रूप से खराब हो गयी हैं।  उनके साथ लैंगिग भेदभाव किया जा रहा है | उन्हें उचित शिक्षा भी नहीं दी जा रही है। जिस कारण बेटियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। इस वजह से वह हर क्षेत्र में पिछड़ गई है।हमारे देश में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही कन्या भ्रूण हत्या भी लोगों की मानसिकता का परिचय देती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है- What is Beti bachao beti padhao yojana

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (BBBP) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल है।  इस योजना का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा राज्य के पानीपत जिले में इसका उद्घाटन किया था।

क्योंकि हरियाणा राज्य में 1000 लड़कों पर सिर्फ 775 लड़कियां ही थी। जिस कारण वहां का लिंगानुपात गड़बड़ा गया था।  इस योजना को शुरुआत में पूरे देश के 100 जिलों में जहां पर सबसे अधिक लिंगानुपात गड़बड़ाया हुआ था वहां पर इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया। और आगामी वर्षों में इसे पूरे देश में लागू किया गया।

इसे भी पढ़ेंबिहार राशन कार्ड सूची 2020: Bihar New Ration List APL/BPL

BBBP Scheme Highlights

योजना का नाम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
इनके द्वारा शुरू की गयी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा
लॉन्च की तारीक 22 जनवरी 2015
उद्देश्य लड़कियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना
विभाग महिला और बाल विकास मंत्रालय
ऑफिसियल वेबसाइट https://wcd.nic.in/

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य

  1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी मानसिकता को बदलना है।
  2. बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाना संभव हो पायेगा।
  3. भेदभाव पूर्ण लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन कर गांव का अस्तित्व और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  4. घर-घर में बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करना।
  5. लिंग आधारित भ्रूणहत्या की रोकथाम।
  6. लड़कियों की शिक्षा और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।

बच्चों के लिंग अनुपात, जो 0-6 वर्ष आयु के प्रति 1000 लड़कों के तुलना लड़कियों की संख्या से निर्धारित होता है। भारत देश के आजादी के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई थी जिसमें पाया गया कि 1000 लड़कों पर सिर्फ 945 लड़कियां ही है लेकिन आजादी के बाद स्थिति और भी खराब होती गई जिसके कुछ आंकड़े इस प्रकार हैं:-

वर्ष लिंगानुपात प्रति 1000 लड़कों पर
1991 945
2001 927
2011 918

लड़कियों की इतनी कम जनसंख्या होना यह किसी आपदा से कम नहीं है। यह बच्चे के लिंग चुनाव द्वारा जन्मपूर्व भेदभाव और लड़कियों के प्रति जन्म उपरांत भेदभाव को दर्शाता है।

इस मानसिकता के दिन प्रतिदिन बढ़ने के कारण बेटियों की जनसंख्या में कमी आने लगी क्योंकि बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाने लगा है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 5 करोड़ लड़कियों की कमी है

जिसका संज्ञान लेते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत को चेतावनी दी कि अगर जल्द ही लड़कियों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया तो भारत में जनसंख्या के बदलाव के साथ-साथ अन्य कई विपत्तिया सकती हैं।  इसलिए हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों की सुरक्षा और बेटियों की शिक्षा दीक्षा के लिए एक नई योजना का प्रारंभ किया जिसका नाम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ रखा गया।

इसे भी पढ़ेंयूपी प्रवासी श्रमिक पंजीकरण – प्रवासी मजदर रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन

बेटियों की दुर्दशा के कारण –

भारत में जब से नई तकनीकों का विकास हुआ है लोग तब से सिर्फ अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए जीने लगे हैं जिस कारण से बेटियों की स्थिति हमारे देश में बहुत ही दयनीय हो गई है। उनकी इस स्थिति का जिम्मेदार और कोई और नहीं आप और हम ही हैं।

क्योंकि हमारे जैसे लोग ही बेटे और बेटियों में भेदभाव करने लगे हैं।  जिस कारण बेटियां देश में असुरक्षित महसूस करने लगी हैं और उनकी जनसंख्या में भी काफी गिरावट आई है। कई राज्यों में तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि वहां के युवाओं की अब शादी भी नहीं हो पा रही है।

आइए जानते हैं कि ऐसे कौन से कारण हैं जिसकी वजह से आज हमारे देश की बेटियों की हालत गंभीर रूप से बहुत ही दयनीय हो गई है।

  1. लैंगिग भेदभाव
  2. कन्या भूण हत्या
  3. लोगों में शिक्षा की कमी
  4. भ्रष्ट मानसिकता
  5. दहेज प्रथा

बेटियों की दुर्दशा के दुष्प्रभाव

  1. जनसंख्या वृद्धि
  2. लड़कियों की जन्म दर कम होना
  3. बलात्कार और शोषण की घटनाएं बढ़ना
  4. देश का धीमी गति से विकास

लड़कियों की दुर्दशा सुधारने के उपाय

  1. लिंग जांच को रोकना
  2. स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना
  3. लड़कियों के प्रति भेदभाव को रोकना
  4. लोगों की मानसिकता बदलना
  5. लड़कियों की सुरक्षा के प्रति सख्त कानून का निर्माण करना

इस दिशा में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाये गये कदम :

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय :

  • गर्भधारण की पहली तिमाही के दौरान ही आंगनवाड़ी केंद्रों में गर्भधारण के पंजीकरण को बढ़ावा देना।
  • नई महिला उद्यमियों के प्रशिक्षण का कार्य।
  • सामुदायिक गतिशीलता और संवेदीकरण।
  • लैंगिक समर्थन की भागीदारी।
  • पुरस्कार वितरण एवं विभिन्न संस्थाओ को मान्यता देना|

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 

  • पक्षपात और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी)  अधिनियम, 1994 के कार्यान्वयन की निगरानी।
  • संस्थागत प्रसव में वृद्धि।
  • बच्चों के जन्म का पंजीकरण।
  • पीएनडीटी प्रकोष्ठों को मजबूत बनाना।
  • निगरानी समितियों की स्थापना।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय 

  • लड़कियों का सार्वभौमिक नामांकन।
  • लड़कियों की पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर को कम करना।
  • स्कूलों में लड़कियों के साथ दोस्ताना, मिलनसार व्यवहार।
  • शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम को लागू करना।
  • लड़कियों के लिए कार्यात्मक शौचालयों का निर्माण।

राष्ट्रीय मीडिया अभियान

  • बालिका के जन्म का जश्न मनाने और शिक्षा के लिए प्रगतिशील सुधारों को सक्षम करने के लिए,मीडिया द्वारा एक देशव्यापी अभियान शुरू किया गया था|
  • अभियान का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को सुनिश्चित करना, उचित शिक्षा की उपलब्धता और स्वास्थ्य संबंधी सुधारों को सुनिश्चित करना है
  • देश के सशक्त नागरिक बनने के लिए लैंगिक भेदभाव के बिना एक समान मंच की उपस्थिति सुनिश्चित करना
  • राष्ट्र भर में मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए 360 डिग्री मीडिया दृष्टिकोण का विस्तार करना|

योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन कैसे करें

लड़की के नाम पर एक बैंक का खाता खोलना पहला बुनियादी कदम है। इस योजना का लाभ उठाने के इसके नियमों का पालन करना आवश्यक है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ लाभ के तहत नामांकित करने के लिए दिए गए चरणों का पालन करें:

  • जहां भी स्कीम उपलब्ध हो, वहां के बैंक या पोस्ट ऑफिस जाएं
  • बीबीबीपी / एसएसए के लिए आवेदन पत्र प्राप्त करें और उसे भरें
  • फॉर्म को मैन्युअल रूप से भरना है और सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ संलग्न करना है
  • उसी बैंक / डाकघर में दस्तावेज जमा करें। खाता बालिका के नाम से खोला जाना चाहिए

नोट: इस खाते को एक बैंक / डाकघर के खाते से दूसरे बैंक / डाकघर के खाते में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है

इसे भी पढ़ें- हरियाणा मेरा पानी मेरी विरासत योजना – आवेदन, जानकारी, अपडेट

योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

बेटी बचाओ बेटी पढाओ लाभ के तहत ऑनलाइन नामांकित करने के लिए दिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  • आवेदक को सर्वप्रथम महिला और बाल विकास मंत्रालय की ऑफिसियल वैबसाइट (Official Website) पर जाना होगा | ऑफिसियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपके सामने होम पेज खुल जायेगा |
  • इस होम पेज पर आपको Women Empowerment Scheme का ऑप्शन दिखाई देगा| इस ऑप्शन पर आपको क्लिक करना होगा|
  • क्लिक करने के बाद आपके सामने एक दूसरा पेज खुल जाएगा| इस पेज पर आपको Beti Bachao Beti Padhao Yojana के विकल्प पर क्लिक करना होगा | ऐसा करने पर आपके सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर नया पेज खुल जायेगा |
  •  पूर्वक सूचना पढ़ने के बाद  दिये गए जानकारी के हिसाब से आवेदन की प्रक्रिया को पूर्ण करे|
  • इस तरह आपका ऑनलाइन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की आवेदन प्रक्रिया पूर्ण हो जाती हैं|

आयु सीमा

10 साल तक के उम्र की सभी लड़कियां इस योजना के तहत पात्र हैं। उनके नाम पर बैंक खाता खोलना आवश्यक है।

कर मुक्त योजना – प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई यह योजना पूरी तरह से कर मुक्त है। आपका खाता खुलने के बाद उसमें से किसी भी राशि की कटौती नहीं की जाएगी।

आवश्यक दस्तावेज

  • बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र।
  • माता-पिता या कानूनी अभिभावक के पहचान का सबूत।
  • माता-पिता या कानूनी अभिभावक के पते का प्रमाण।
  • आधार कार्ड
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों, नियमों और विनियमों के अनुसार, प्रवासी भारतीय इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकते। सुकन्या देवी योजना डाकघर बचत खाता नियम 1981 के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसलिए प्रवासी भारतीय इस श्रेणी के अंतर्गत नहीं आते हैं।

बच्चियों को प्राप्त होने वाले लाभ:-

  • आप अपनी बच्ची के लिए एक खाता खोल पाएंगे जो आपका वित्तिय बोझ कम करेगा और लड़की को उसकी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए पैसा मिल जाएगा।
  • सरकार सभी छोटे बचतकर्ताओं के लिए बीबीबीपी योजना के तहत सबसे अधिक ब्याज दर प्रदान करती है। इसके सहायता से आप अपनी बेटी के भविष्य के लिए और अधिक पैसा बचा सकते हैं।
  • इस खाते को अधिनियम 1961 यू/एस 80 सी के तहत छूट प्राप्त है। लड़की का खाता कर-मुक्त होगा।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ के लक्ष्य प्रेक्षक

यह निश्चित है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक पहल है जो पूरे देश को लक्षित करती है। हालांकि, पहुंच को आसान बनाने के लिए, BBBP के लिए लक्षित दर्शकों के संबंध में तीन वर्गीकरण किए गए हैं:

प्राथमिक समूह: जिसमें युवा और विवाहित जोड़े, गर्भवती माताएं और माता-पिता शामिल हैं|

माध्यमिक समूह: देश के युवाओं को शामिल करना, डॉक्टर, ससुराल, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर|

तृतीयक समूह: देश के सामान्य लोगों सहित, फ्रंटलाइन कार्यकर्ता, अधिकारी, धार्मिक नेता, स्वैच्छिक संगठन, मीडिया और महिला एसएचजी (SHGs)

इस योजना का सबसे अच्छा पहलू –

खाता खोलने के समय से महिला के 21 साल की उम्र प्रप्त कर लेने पर यह खाता परिपक्व हो जाएगा। उसकी उम्र 18 साल की होने के बाद ही उसे उच्च शिक्षा के लिए धन प्राप्त होगा। जब वह 21 साल की हो जाएगी तो आप उसकी शादी के लिए खाते से पैसे निकालने में सक्षम हो पाएंगे। इस खाते की अधिकतम अवधि सीमा 21 वर्ष है।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि जिस देश में महिलाओं का सम्मान नहीं होता उस देश की प्रगति कभी भी नहीं हो सकती है। इस कथन का पालन करते हुए हम अपने समाज के उत्थान के साथ देश के विकास में भी योगदान कर सकते हे |

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के संबंध में पूछे जाने वाले समान्य प्रश्न

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का वृहत उद्देश्य क्या हैं?

यह योजना जागरूकता पैदा करेगी और महिलाओं के लिए कल्याणकारी सेवाओं के वितरण की दक्षता में सुधार करेगी। इस प्रकार, इस योजना को शुरू करके सरकार महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों, सुरक्षा और सुरक्षा, गतिशीलता और त्वरित न्याय सहित अनुकूल वातावरण बनाकर लैंगिक असमानता को खत्म करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

हरियाणा को बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान शुरू करने के लिए क्यों चुना गया?

राज्य में लिंगानुपात के बढ़ते मामलों के कारण हरियाणा को राष्ट्रव्यापी बेटी बचाओ-बेटी पढाओ पहल के लिए चुना गया था। यह देश में सबसे कम बाल लिंग अनुपात वाला राज्य है, जहाँ प्रति 1000 लड़कों पर 879 लड़कियों की संख्या है, जो कि प्रति 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों के राष्ट्रीय बाल लिंग अनुपात के विपरीत है|

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की न्यूनतम आयु सीमा क्या है?

10 साल तक के उम्र की सभी लड़कियां इस योजना के तहत पात्र हैं। उनके नाम पर बैंक खाता खोलना आवश्यक है, तभी वे योजना का लाभ उठा सकती हैं| प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई यह योजना पूरी तरह से कर मुक्त है। आपका खाता खुलने के बाद उसमें से किसी भी प्रकार की राशि की कटौती नहीं की जाएगी।

Amrita:

View Comments (0)