Desh Bhakti Kavita in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi । देशभक्ति कविता ( Desh Bhakti Kavita in Hindi)

Desh Bhakti Kavita in Hindi– गणतंत्र दिवस ( 26 जनवरी ) हो या स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) हो बच्चे स्कूलों में देश भक्ति पर आधारित कविता लिखने को दी जाती हैं. इन देशभक्ति कविता को बच्चे स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाते भी हैं. तो आज हम आपके साथ अपने कविता कोश से निकालकर कुछ बहुत ही सुन्दर लोकप्रिय देश भक्ति की कविताएं आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं जिन्हे स्कूल के बच्चे Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 व 10 के Students पढ़कर उन्हे अपने स्कूल में होने वाले प्रोग्राम में प्रस्तुत कर सकें।

यह बहुत ही लोकप्रिय देश भक्ति गीत कविताएं हैं जिन्हे कोई भी पढ़ेगा, उसके अंदर देशभक्ति की भावना जागृत हो जाएगी, और आप भी अपने देश के प्रति प्रेम को उजागर कर पायेंगे। आइये देखते हैं देशभक्ति हिन्दी कविताएं बच्चों के लिए।

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Desh Bhakti kavita in hindi देशभक्ति कविताएं हिंदी में

दोस्तो इंटरनेट पर बच्चे स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर Desh Bhakti Poem in Hindi, Desh Bhakti Kavita, Desh Bhakti Kavita in Hindi, Desh Bhakti Poem, Hindi Desh Bhakti Kavita, Patriotic Poem in Hindi, Hindi Patriotic Poems, Poem on Desh Bhakti in Hindi, Short Desh Bhakti Poem in Hindi आदि की तलाश करते हैं तो अब उनको परेशान होने की जरूरत नहीं है. यहां हम Hindi Poems for Kids का बहुत ही सुन्दर कलैक्शन लेकर आये हैं. जो आपको बेहद पसंद आने वाली हैं.

Jaha Dal Dal Par Sone Ki Chidiya Karti Hai Basera – हिन्दी कविता बच्चों के लिए

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा
जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा
अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा
जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा
– राजेंद्र किशन

Veer Tum Badhe Chalo – देशभक्ति कविता बच्चों के लिए

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
– द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
 

वीर तुम बढ़े चलो – Desh Bhakti Poem in Hindi

वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
तुम से ही तो हम सब हैं
तुम नहीं तो कुछ नहीं….
तुम नहीं होते, तो ये देश हो जाता वीरान
तुम हीं हो पूरे हिन्द की जान
तुमसे हीं ये है हिन्दुस्तान
तुमसे हीं सरहदें सुरक्षित हैं
तुमसे हीं माँ-बहनें सुरक्षित हैं
तहे दिल से सलाम है उस माँ को
जिसने तुम जैसे वीर को जन्म दिया
जिस माँ ने भारत माँ को अपने बेटे को सौंप दिया
तहे दिल से सलाम है तुम्हारी बहादुरी को जवान
सलाम है, तुम्हारी निःस्वार्थ भावना को
अपने खून बहाकर भी लोगों की रक्षा करना कोई तुमसे सीखे
हर दर्द सहते हुए भी जिंदादिली से जीना कोई तुमसे सीखे
राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व लुटाना कोई तुमसे सीखे
मेरी क्या बिसाद जो मैं कुछ लिख सकूं तुम्हारी शान में …
मेरे तो शब्द भी तुच्छ पड़ जाते हैं………..
तुम्हारे तेज, तुम्हारी बहादुरी और तुम्हारी बुद्धि के आगे…..
हर कोई तुम्हारी तरह हो भारत पर हो कुर्बान
भारत माँ के सच्चे प्रहरी तुम हीं हो वीर जवान …
तुमसे हीं है देश की आन बान शान….
वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
– नमिता कुमारी

Veer Tum Badhe Chalo

Desh Bhakti Kavita – ऐ मेरे वतन के लोगों

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जब घायल हुआ हिमालय ख़तरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली
क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं
थे धन्य जवान वो अपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जय हिंद जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद
– प्रदीप

Desh Bhakti Poems in Hindi by Rabindranath Tagore – सारे जहाँ से अच्छा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥
ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥

Hindi Desh Bhakti Kavita – आज तिरंगा फहराता है पूरी शान से…

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।
लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
सजीवन मयंक’

Desh Bhakti Poems in Hindi by Rabindranath Tagore

Patriotic Poem in Hindi –  होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन

होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।
होगी शांति चारों ओर, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होगी शांति चारों ओर एक दिन।
नहीं डर किसी का आज एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज एक दिन।
– गिरिजा कुमार माथुर
 

Ram Prasad Bismil Poems Sarfaroshi Ki Tamanna Ab Hamare Dil Mein Hai

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है||

Short Desh Bhakti Poem in Hindi – ऐसे मातृभूमि तेरी जय हो

ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो
अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में
संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो
वह भक्ति दे कि ‘बिस्मिल’ सुख में तुझे न भूले
वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो
– रामप्रसाद बिस्मिल

Desh Bhakti Kavita Ramdhari Singh Dinkar – आजादी तो मिल गई

आजादी तो मिल गई, मगर, यह गौरव कहाँ जुगाएगा ?
मरभुखे ! इसे घबराहट में तू बेच न तो खा जाएगा ?
आजादी रोटी नहीं, मगर, दोनों में कोई वैर नहीं,
पर कहीं भूख बेताब हुई तो आजादी की खैर नहीं।
(2)
हो रहे खड़े आजादी को हर ओर दगा देनेवाले,
पशुओं को रोटी दिखा उन्हें फिर साथ लगा लेनेवाले।
इनके जादू का जोर भला कब तक बुभुक्षु सह सकता है ?
है कौन, पेट की ज्वाला में पड़कर मनुष्य रह सकता है ?
(3)
झेलेगा यह बलिदान ? भूख की घनी चोट सह पाएगा ?
आ पड़ी विपद तो क्या प्रताप-सा घास चबा रह पाएगा ?
है बड़ी बात आजादी का पाना ही नहीं, जुगाना भी,
बलि एक बार ही नहीं, उसे पड़ता फिर-फिर दुहराना भी।
 ~ रामधारी सिंह दिनकर

दोस्तो ऊपर प्रस्तुत की गयी यह देशभक्ति Hindi Patriotic Poems हैं, इन Desh Bhakti Poem in Hindi for Class 1, class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9 का कोई भी छात्र स्कूल में होने वाले सास्कृतिक कार्यक्रम में Desh Bhakti Kavita in Hindi को प्रस्तुत कर सकता है।

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