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Eid Milad un Nabi History / information in hindi । इस्लामिक त्यौहार ईद मिलाद उन नवी का इतिहास

Eid Milad un Nabi History / information in hindi – इद-मिलाद-उन-नबी (Eid milad un nabi ) एक इस्लामिक त्यौहार है जिसे पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म की खुःशी में मनाया जाता है। इस त्यौहार को ‘ईद-ए-मिलाद’ (Eid-E-Milad) व ‘बारावफात’ के नाम से भी जाना जाता है। इस्लाम धर्म के प्रचार और इसे मजबूत बनाने वाले पैगंबर हज़रत मोहम्मद का योगदान अमूल्य माना जात है। ऐसा भी माना जाता है कि ये इस्लाम के आखिरी नबी है, इनके बाद कयामत तक कोई नबी आने वाला नहीं है। बहुत से लोग मानते हैं कि उन्होंने ही सर्वप्रथम इस्लाम के पांच सिद्धांत रोजा, नमाज, जाकात, तौहीद और हज की यात्रा के बारे में लोगों को जानकारी दी थी।

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ईद-ए-मिलाद कब मनाया जाता है- when Eid-e-Milad is celebrated

यह इस्लामी त्यौहार पैगम्बर मोहम्मद साहब के जन्म दिवस पर इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रबी-अल-अव्वल महीने के बारहवे दिन मनाया जाता है।

ईद-ए-मिलाद को वर्ष 2018 में कब मनाया जायेगा।

साल 2018 में यह त्यौहार  20 नवम्बर से 21 नवम्बर तक मनाया जा रहा है।

मिलाद-उन-नबी को कैसे मनाते हैं -How to celebrate Milad-un-Nabi

इस त्यौहार को लेकर मुस्लिम समुदाय में ही अलग-अलग मत है जिसके मुताविक शिया और सुन्नी दोनों इस त्यौहार को अलग-अलग तरीक से मनाते हैं। जो इस प्रकार है-

शिया मुसलमानों द्वारा मिलाद उन नबी को मनाने का तरीका-

शिया मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्यौहार को इसलिए मनाते है क्योंकि वह मानते हैं कि इसी दिन गाधिर-ए-खुम (Gadhir-E-Khumm) में पैगंबर मुहम्मद ने हज़रत अली को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। यह अवसर हबिल्लाह को इंगित करता है कहने का मतलब एक चैन सिस्टम की अमामत जिसमें एक नए नेता की शुरूआत होती है। इसके साथ ही शिया समुदाय के लोग इस दिन पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्म की खुशी में इसे मनाते हैं।

सुन्नी मुसलमानों द्वारा मुलाद उन नबी मनाने का तरीका-

वहीं सुन्नी मुस्लिम समुदाय को लोग इस दिन उनकी मौत का दिन मानते हैं इस कारण वह पूरे माह शोक मनाते हैं।

इस समुदाय के लोग प्रार्थना मस्जिदों में महीने भर के लिए जाते है। 12 वें दिन सुन्नी मुस्लिम के लोग पवित्र पैगंबर और उनके द्वारा बताये गये सही विचारों और मार्ग को याद करते हैं।

इस दिन होने वाले कार्यक्रम-

इस दिन लोग बड़े-बड़े जुलूस निकालकर पैगंबर मुहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशानों पर प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही दिन रात भर प्रार्थनाएं चलती हैं। इस दिन पैगंबर हज़रत साहब के बारे में पढ़ा जाता है साथ ही उनके जीवन के बारे में बताया जाता है जिससे लोगों में शांति का सन्देश प्रेषित हो सके।

इस्लाम का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान भी इस दिन पढ़ा जाता है. इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन को नियम से निभाने से लोग अल्लाह के और करीब जाते हैं और उनपर अल्लाह की रहम होती है.

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