Holi

होली कितनी तारीख को हैं व कथा ( Holi Kitni Tarikh ko Hai, Holika Dahan Kab Hai)

होली कितनी तारीख को हैं एवं होलिका दहन कब है व कथा ( Holi Kitni Tarikh ko Hai, Holika Dahan Kab Hai & Holika Dahan Date एवं Holi 2019 Date, Story of Holika Dahan in Hindi):

भारत विविधाओं से भरा देश हैं यहां विभिन्न जाति-समुदाय के व्यक्ति रहते हैं। यही कारण है कि यहां त्यौहार बहुत मनाये जाते है, एक त्यौहार समाप्त होते ही दूसरे की तैयारी होने लगती है। इसी कड़ी में अब होली के पर्व ( Holi Parv ) की बारी आ गयी है। होली का त्यौहार ( Holi Festival ) हिन्दुओं का प्रमुख त्य़ौहार है जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है।

होली रंगों ( Colourful Holi Festival ) से भरा और मौज-मस्ती करने वाला त्यौहार हैं जो फाल्गुन माह में होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन ( Holika Dahan ) किया जाता हैं और अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है। आप Holi Messages in Hindi भी पढ़ सकते हैं।

होली 2019 का मुहूर्त– Holi Kab Hai & Holi 2019 Date

Holi Kitni Tarikh ko Hai? होली का त्यौहार वर्ष 2019 में 21 मार्च को पड़ रहा है, जैसा कि आप जानते हैं होली से एक दिन पहले शाम को होलिका दहन किया जाता है।

Holika Dahan Kab Hai? जैसा कि ऊपर बताया गया हैं कि होलिका दहन होली से एक दिन पूर्व मनाया जाता है तो इस बार होलिका दहन ( Holika Dahan Date ) 20 मार्च को है। इसका शुभ मुहूर्त ( Holi Muhurt ) 8.57 से शुरू होगा और देर रात 12.28 बजे तक रहेगा।

आप यहां Holi Shayari in Hindi को पढ़ सकते हैं.

आखिर क्यों मनाई जाती है होली ? Story of Holika Dahan in Hindi & Holika Dahan Katha in Hindi

Holika Dahan Story & Story of Prahlad in Hindi – एक पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्ष था जिसका एक पुत्र था प्रहलाद नाम का। हिरणाकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था वहीं उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत ही बड़ा भक्त था। जबकि हिरणाकश्यप नहीं चाहता था कि उसके राज्य में भगवान विष्णु की कोई भी पूजा करें। जिस पर उसने अपने पुत्र को कई बार भगवान विष्णु की पूजा करने से मना किया, जब प्रहलाद नहीं माने तो हिरणाकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रहलाद को कई बार जान से मारने का प्रया किया लेकिन सफल नहीं हो सका।

इसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका जिसे वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी, उसे पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए भेजा। इस पर होलिका प्रहलाद को अपनी गोदी में उठाकर आग में कूंद गई लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के परमभक्त थे वह विष्णु जी का जाप करते रहे जिस पर उन्हे तो कुछ नहीं हुआ लेकिन होलिका जल कर राख हो गई। तभी से होलिका दहन मनाने की परंपरा चली आ रही है जिसे हर वार मनाया जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है।

यहां आप यह भी पढ़ सकते हैं कि होली का रंग कैसे हटाएं।

उम्मीद है मेरे द्वारा बताई गयी जानकारी होली कितनी तारीख को है, होली कब है व होलिका दहन तारीख एवं Story of Holika Dahan in Hindi के बारे में दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी। आप इस जानकारी को अपने मित्रों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।

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