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Karwa Chauth 2018 Vrat Katha & Pooja vidhi in Hindi । करवाचौथ व्रत कथा व पूजा विधि

Karwa Chauth 2018 Vrat Katha & Pooja vidhi in Hindi : नमस्कार दोस्तो एक बार फिर से आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग Technicaldiwanji.com पर दोस्तो यदि आप Internet पर ढ़ूढ़ रहे हैं कि करवाचौथ कैसे मनाते हैं (karwa chauth kaise manate hai), करवा चौथ व्रत व पूजा विधि (karwa chauth vrat & Pooja vidhi) क्या होती हैं, इसके अलावा करवाचौथ की थाली (karwa chauth pooja thali) को कैसे लगाते या सजाते हैं. इसके साथ करवाचौथ की व्रत कथा (karwa chauth vrat katha) क्या होती हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आये हैं. क्योंकि यहां हम आपको Karwa chauth vrat katha in hindi व Karva Chauth pooja vithi आदि के बारे में पूरा जानकारी दूंगा.

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत का पूर्ण विर्ण वामन पुराण में किया गया है। यह व्रत हर साल आता है लेकिन सही विधि से न करने की वजह से इसका फल नहीं प्राप्‍त हो पाता। सुहागिन महिलाओं के लिये यह दिन काफी अहम है क्‍योंकि वह यह व्रत पति की लंबी आयु और घर के कल्‍याण के लिये रखती हैं।

यह व्रत केवल शादी-शुदा महिलाओं के लिये ही होता है। अक्‍सर महिलाएं अपनी मां या फिर अपनी सास से करवा चौथ करने की विधि सीखती हैं लेकिन अगर आप अपने घर से दूर रहती हैं और यह व्रत करना चाहती हैं तो इसकी विधि जाननी जरुरी है। तो आइये जानते क्‍या है करवा चौथ के कथा और व्रत की सही विधि।

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karwa chauth katha Pooja Vidhi

करवा चौथ व्रत कथा- Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है।

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है।

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करवा चौथ 2018 । Karwa chauth 2018 date

वर्ष 2018 में करवा चौथ का व्रत 27 अक्टूबर शनिवार को है। इस दिन पूजन का शुभ महूर्त शाम 5.05 से 7.09 तक है। रात्रि में चाँद दिखने का समय 8.15 का है।

करवा चौथ के लिए आवश्यक सामग्री- karwa chauth vrat samagri in hindi

  1. करवा चौथ कि किताब:यह किताब कथा पढ़ने के लिये जरुरी है। इस कथा कि किताब में लिखी हुई कहानी को घर की कोई बुजुर्ग महिला या फिर पंडित जी पढते हैं।
  2. पूजा थाली(karwa chauth pooja thali): पूजा की थाली में रोली, चावल, पानी से भरा करवा लोटा, मिठाई, दिया और सिंदूर रखें। पंजाब में व्रत रखने वाली महिलाएं थाली में स्‍टील की छननी, पानी भरा गिलास और लाल धागा रखती हैं तो वहीं पर राजस्‍थान में महिलाएं गेहूं, मिट्टी आदि रखती हैं।
  3. करवा: काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर रख लें. अब इस मिटटी को तांबे के करवा में रखें.
  4. श्रृंगार वस्‍तुएं: अपने पति को लुभाने के लिये महिलाएं उस दिन दुल्‍हन की तरह श्रृंगार करती हैं। हाथों में महंदी और चूडियां पहनती हैं।
  5. पूजन विधि: बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।
  6. खाने की वस्‍तुएं: हर घर में अलग-अलग प्रकार की मिठाइयां बनाई जाती हैं। कई लोग कचौड़ी, सब्‍जी और अन्‍य व्‍यंजन बनाते हैं।

करवा चौथ व्रत विधि (Karwa Chauth Vrat Vidhi in Hindi)

करवा चौथ वाले दिन सुहागिन महिलायें यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’

करवा चौथ के दिन गणेश, शिव, पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है। अतः दीवार पर या किसी कागज़ पर इन सभी के चित्र बनाकर पूजा की जाती है। पूजा करते वक़्त एक लोटे में जल और गेहूं से भरा एक करवा रखते है।

करवाचौथ को पुरे दिन महिलायें बिना अन्न व जल के रहती है। शाम को करवाचौथ की कहानी सुनी जाती है तथा विधिपूर्वक गणेश, शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। पूजन के पश्चात रात्रि के समय छननी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करें उसे अर्घ्य प्रदान करें। फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आर्शिवाद लें। फिर पति देव को प्रसाद दे कर भोजन करवाएं और बाद में खुद भी करें।

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