X

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना कब हुई और शामिल होने के फायदे क्या है?

RSS (स्वयं सेवक संघ): आज पुर देश में संघ (RSS) का नाम बहुत फैला है परन्तु संघ के बारे में बहुत सारे लोगों को प्राथमिक जानकारी भी नहीं होती है।

आज के इस युग में जिस परिस्थिति में हम रहते हैं, ऐसे एक-एक, दो-दो, इधर-उधर बिखरे, पुनीत जीवन का आदर्श रखनेवाले उत्पन्न होकर उनके द्वारा धर्म का ज्ञान, धर्म की प्रेरणा वितरित होने मात्र से काम नहीं होगा। आज के युग में तो राष्ट्र की रक्षा और पुन:स्थापना करने के लिए यह आवश्यक है

स्वयंसेवक होने से बढ़कर गर्व और सम्मान की दूसरी बात हमारे लिए कोई नहीं है। जब हम कहते हैं कि मैं एक साधारण स्वयंसेवक हूँ, तब इस दायित्व का बोध हमें अपने हदय में रखना चाहिए कि यह दायित्व बहुत बड़ा है। समाज की हमसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ रहें और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए हम उनसे भी अधिक अच्छे प्रमाणित हों।

चुनौतियां

1925 से चली अपनी दीर्घ यात्रा में संघ (RSS) आज देश के शीर्ष और प्रभावी स्वयंसेवी संगठन के रूप में उभरा है। परन्तु इस कालखंड में काफी उतार चढ़ाव से संघ को गुजरना पड़ा है। समाज के सभी वर्गों से व्यक्तिगत संपर्क और ह्रदयपूर्वक संवाद की अपनी अनोखी कार्यपद्धति के कारण संघ ने बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से किया है।

RSS की स्थापना कब और कैसे

दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने की थी. भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई थी. और 2025 में ये संगठन 100 साल का हो जाएग, नागपुर के अखाड़ों से तैयार हुआ संघ मौजूदा समय में विराट रूप ले चुका है।

संघ का नामकरण

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) यह नाम अस्तित्व में आने से पहले विचार मंथन हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल इन तीन नामों पर विचार के लिए बैठक में मौजूद 26 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना मत दिया, जिसके बाद आरएसएस अस्तित्व में आया।

तिरंगे का विरोध

आरएसएस (RSS) के मुखपत्र द ऑर्गनाइजेशन ने 17 जुलाई 1947 को नेशनल फ्लैग के नाम से संपादकीय में लिखा कि भगवा ध्वज को भारत का राष्ट्रीय ध्वज माना जाए. 22 जुलाई 1947 को जब तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज माना गया तो द ऑर्गेनाइजेशन ने ही इसका जमकर विरोध किया. काफी लंबे समय तक संघ तिरंगा नहीं फहराता था. हाल ही में आरएसएस ने अपने को बदला है. यहां तक कि आरएसएस के धुर विरोधियों ने भी उसे जगह देना शुरू किया.

संघ (RSS) के साथ जुड़े अन्य संगठन

अनेक संगठन हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रेरित हैं और स्वयं को संघ परिवार के सदस्य बताते हैं। संघ दुनिया के लगभग 80 से अधिक देशों में कार्यरत है। वो संगठन कुछ इस प्रकार है:

  • भारतीय जनता पार्टी
  • विश्व हिन्दू परिषद
  • बजरंग दल
  • हिन्दू जागरण मंच
  • भारतीय किसान संघ
  • हिन्दू स्वयंसेवक संघ
  • लघु उद्योग भारती
  • विवेकानंद केंद्र
  • भारतीय मजदूर संघ
  • सेवा भारती
  • राष्ट्र सेविका समिति
  • अखिल भारतीय विश्व परिषद
  • विद्या भारती
  • सरस्वती शिशु मंदिर
  • वनवासी कल्याण आश्रम

संघ से जुङे आरोप

महात्मा गांधी पर गोली चलाने वाले नाथूराम गोडसे इसी आर.एस.एस संघ (RSS) के पूर्व सदस्य एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भूतपूर्व स्वयंसेवक थे। महात्मा गांधी की हत्या करने के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन बाद में एक जांच समिति का गठन हुआ, जिसके रिपोर्ट के बाद संघ को इस आरोप से मुक्त किया गया और इसके ऊपर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कैसे जुड़े?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 18 साल से निम्न उम्र के बच्चों के मन में शुरू से ही देशभक्ति की भावना जागृत करने के लिए भारती और बालगोकुल जैसे कार्यक्रम चलाती है। यहां तक कि विश्वविद्यालय में छात्रों को अपनी संघ के प्रति आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित करती है।
यदि आप इस में जुड़ना चाहते हैं और इनके साथ जुड़कर काम करना चाहते हैं तो आपको इस संघ के साथ साप्ताहिक, मासिक और दैनिक गतिविधियों में शामिल होकर इनका हिस्सा बनना होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खुद की ऑफिशियल वेबसाइट www.rss.org है। यदि आप इस संघ में जुड़ना चाहते हैं तो इनकी इस वेबसाइट पर जाकर वहां पर दी जाने वाली फॉर्म में अपने सभी पर्सनल जानकारियों को भर कर जमा कर सकते हैं और उनकी सदस्यता पा सकते हैं।
आप जहां भी रहती हो आप वहां से इसमें जुड़कर काम कर सकते हो। इस संघ की कई सारी शाखाएं भारत के हर एक क्षेत्र के विभिन्न जिले और प्रांत में मौजूद है, जहां पर यह सभी स्तर के संघ मंडली की बैठक आयोजित करते हैं।

आरएसएस (RSS) कुछ रोचक तथ्य

  • आरएसएस (RSS) का मुख्यालय नागपुर, महाराष्ट्र में है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी है जो ब्राह्मण जाति से संबंध रखते है। मोहन भागवत भारत के उन थोड़े से लोगो में से है जिन्हें Z+ सुरक्षा दी गई है।
  • 30 जनवरी, 1948 को बिड़ला भवन, दिल्ली में शाम 5 बजकर 10 मिनट पर नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गाँधी की हत्या की थी। हत्या के बाद आरएसएस का नाम उछाला गया। कहा गया कि गोडसे आरएसएस का ही सदस्य है जबकि गोडसे ने आरएसएस को सन 1930 में ही छोड़ दिया था। इसी समय पूरी दुनिया को पता चला कि भारत में कोई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का कोई संगठन भी है।
  • आरएसएस की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग (संघी) शामिल हुए थे लेकिन आज देशभर में आरएसएस की 60,000 से ज्यादा शाखाएँ है और एक शाखा में लगभग 100 स्वयंसेवक है। आज के समय में आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है।
  • आरएसएस की शाखाओं में शाखा के अंत में एक प्रार्थना गाई जाती है “नमस्ते सदा वत्सले”। यह संघ की स्थापना के 15 साल बाद गाई जाने लगी। इससे पहले एक श्लोक मराठी और एक श्लोक हिंदी में गाया जाता था।
  • आरएसएस के प्रचारक को संघ के लिए काम करते समय तक अविवाहित रहना होता है और दूसरे होते है संघ के विस्तारक, जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संघ से किशोरों को जोड़ने का काम करते है।
  • BJP के बड़े नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक रह चुके है।
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ भारत में ही नही बल्कि दुनिया के 40 देशो में है। विदेश में संघ की पहली शाखा मोंबासा, केन्या में लगी थी।
  • आरएसएस धर्म और संस्कृति के आधार पर हिंदू समाज को शक्तिशाली बनाने की बात करता है।
  • बीजेपी की स्थापना संघ से निकले हुए स्वयंसेवकों के द्वारा ही हुआ है।
  • 1990-92 में अयोध्या मे गिराई गई बाबरी मस्जिद मामले में भी संघ पर ही आरोप लगाया गया था।

हिन्दी समास:-Samas in Hindi Full Detail with Examples

100+ Good Night images Shayari:- गुड नाइट शायरी HD फोटो in Hindi

Rahul Pal: